पिछले साल के आखिरी महीने में भी देश के वाहन बाजार में खूब रौनक रही। दोपहिया और चार पहिया के साथ-साथ व्यावसायिक वाहनों की बिक्री में भी जबर्दस्त वृद्धि हुई। दिसंबर में टाटा मोटर्स की नैनो ने भी खूब रफ्तार पकड़ी। इस दौरान नैनो की बिक्री 5,784 तक पहुंच गई। नवंबर में केवल 509 नैनो ही बिकी थीं। इसके अलावा महिंद्रा एंड महिंद्रा और फोर्ड इंडिया की बिक्री में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2010 में देश की दूसरी सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी हुंडई मोटर की सालाना बिक्री पहली बार छह लाख के आंकड़े को पार कर गई। वहीं, जनरल मोटर्स की सालाना बिक्री भी पहली बार एक लाख के पार पहुंची। दोपहिया वाहन कंपनियों में टीवीएस ने दिसंबर में रिकॉर्ड 1,71,790 वाहन बेचे, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 42 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया की कुल वाहन बिक्री 20 फीसदी बढ़कर 1,40,642 पर पहुंच गई। समीक्षाधीन अवधि में यामाहा मोटर की कुल वाहन बिक्री में भी करीब 70 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। टाटा मोटर्स ने दिसंबर के दौरान घरेलू बाजार में कुल 19,706 यात्री वाहन बेचे। पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले यह 34.48 फीसदी अधिक है। कंपनी की व्यावसायिक वाहन खंड में बिक्री 25.08 फीसदी बढ़कर 41,926 वाहन पर पहुंच गई। एक साल पहले इसी महीने में यह आंकड़ा 33,519 पर था। हल्के वाणिज्यिक वाहनों की श्रेणी में कंपनी की बिक्री 35 फीसदी की वृद्धि के साथ 24,558 पर पहुंच गई, जबकि मध्यम आकार वाले वाहनों की बिक्री 14 फीसदी बढ़कर 17,368 हो गई। दिसंबर में महिंद्रा एंड महिंद्रा ने (स्कॉर्पियो, जाइलो, बोलेरो और पिकअप) कुल 14,705 यूटिलिटी वाहन बेचे। दिसंबर 2009 में यह आंकड़ा 11,904 पर था। इस दौरान कंपनी की कार लोगान की बिक्री तिगुनी होकर 896 हो गई। समान अवधि में कंपनी की ट्रैक्टर बिक्री 31.31 प्रतिशत बढ़कर 16,334 पर पहुंच गई। समीक्षाधीन अवधि में फोर्ड इंडिया की बिक्री 172 फीसदी बढ़ गई। कंपनी द्वारा जारी बयान के मुताबिक फिगो को इंडियन कार ऑफ द ईयर 2011 चुना गया। फोर्ड इंडिया के प्रबंध निदेशक माइकल बोनहम ने कहा कि बीता साल कंपनी के लिए यादगार रहा। कंपनी ने मार्च 2010 में फिगो को पेश किया था। अब तक भारत में 60 हजार फिगो बेची जा चुकी हैं। दिसंबर में हुंडई मोटर इंडिया की घरेलू बिक्री 17.60 फीसदी बढ़कर 26,168 हो गई, जो गत वर्ष दिसंबर में 22,252 थी। निर्यात के लिहाज से देश की अग्रणी कंपनी का कहना है कि दिसंबर में उसका वाहन निर्यात 15.64 प्रतिशत बढ़ा। समीक्षाधीन अवधि के दौरान जनरल मोटर्स इंडिया ने 2,691 स्पार्क, 623 क्रूज और 2,523 बीट कारें बेचीं। कंपनी की बिक्री 27 नवंबर 2010 को एक लाख का आंकड़ा पार कर गई। टोयोटा किर्लोस्कर मोटर ने बताया कि दिसंबर 2010 में कंपनी की बिक्री 5.47 फीसदी बढ़कर 6,359 कारों तक पहुंच गई। दुनिया की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी टोयोटा और भारत के किर्लोस्कर समूह के बीच संयुक्त उद्यम टोयोटा किर्लोस्कर ने अपने एसयूवी फॉच्यूनर के लिए इस महीने से बुकिंग खोलने की भी घोषणा की है। इससे पहले यह जुलाई, 2010 में एक महीने के लिए खोली गई थी। होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया ने दिसंबर के दौरान घरेलू बाजार में कुल 53,821 मोटरसाइकिलें और 76,263 स्कूटर बेचे। जबकि उसने कुल 10,558 मोटरसाइकिलों और स्कूटरों का निर्यात किया। वाहन विनिर्माता कंपनी टीवीएस ने दिसंबर में 61,414 मोटरसाइकिलें बेंची, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 49,560 के मुकाबले 24 प्रतिशत अधिक है। कंपनी ने अप्रैल-दिसंबर के बीच कुल 15,12,896 वाहन बेचे। अप्रैल-दिसंबर 2010 के दौरान तिपहिया श्रेणी में कंपनी ने बिक्री में 219 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की। यामाहा मोटर ने दिसंबर में घरेलू बाजार में 26,657 वाहन बेचे। कंपनी के वाहनों का निर्यात दिसंबर में 19.59 फीसदी बढ़कर 8,272 पर पहुंच गया। वर्ष 2010 के दौरान कंपनी ने कुल 3,50,264 दोपहिया वाहन बेचे, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 30.75 फीसदी अधिक है। घरेलू बाजार में वर्ष के दौरान वाहन की बिक्री एक साल पहले की तुलना में 18.46 प्रतिशत बढ़कर 2,58,987 तक पहुंच गई।
Sunday, January 2, 2011
सीएनजी और पीएनजी पर भी चढ़ी महंगाई
महंगाई की आग थमने का नाम ही नहीं ले रही है। अब सीएनजी और पाइप के जरिए सीधे रसोई तक पहुंचने वाली कुकिंग गैस (पीएनजी) के दाम भी बढ़ा दिए गए हैं। दिल्ली में सीएनजी सवा रुपये प्रति किलो बढ़ाकर 29 रुपये और पीएनजी 16.85 रुपये से बढ़ाकर 18.95 रुपये प्रति घनमीटर कर दी गई है। राजधानी में सीएनजी और पीएनजी की आपूर्ति करने वाली कंपनी इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आइजीएल) ने यह वृद्धि की है। कंपनी ने कहा कि नई दरें शनिवार मध्यरात्रि से लागू हो गई हैं। कंपनी ने कहा कि पीएनजी की चार महीने की खपत 90 घनमीटर से अधिक होने पर ग्राहक से 26 रुपये प्रति घनमीटर का दाम वसूला जाएगा। राजधानी से सटे नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में हालांकि सीएनजी पर स्थानीय कर ज्यादा होने के कारण सीएनजी के दाम में डेढ़ रुपये प्रति किलो की वृद्धि होगी और इन जगहों पर यह 32.50 रुपये किलो पर उपलब्ध होगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने से पिछले महीने ही तेल कंपनियों ने पेट्रोल के दाम तीन रुपये प्रति लीटर तक बढ़ा दिए हैं। पीएनजी पर कंपनी ने कहा कि इसका दाम अब 16.85 रुपये से बढ़ाकर 18.95 रुपये प्रति घनमीटर कर दिया गया है। यह मूल्य प्रत्येक चार महीने की अवधि में 90 घनमीटर तक की खपत के लिए होगा। इससे ज्यादा खपत पर दिल्ली में 26 रुपये प्रति घनमीटर की दर से भुगतान करना होगा। दिल्ली और यूपी के कर ढांचे में अंतर के कारण नोएडा और गाजियाबाद में पीएनजी का दाम भी दिल्ली से अधिक होगा। यहां अब चार महीने में 90 घनमीटर तक की खपत के लिए 20.42 रुपये प्रति घनमीटर देने होंगे। इससे ज्यादा की खपत पर 26 रुपये प्रति घनमीटर की दर से भुगतान करना होगा। आइजीएल के प्रबंध निदेशक राजेश वेदव्यास ने कहा कि गैस की लागत बढ़ने के कारण हमें दाम बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ा। बकौल वेदव्यास सीएनजी के दाम बढ़ने से वाहनों की प्रति किलोमीटर लागत में मामूली वृद्धि होगी। ऑटो के लिए यह वृद्धि तीन पैसे प्रति किमी, कार और टैक्सियों के लिए छह पैसे और बसों के मामले में 35 पैसे प्रति किमी होगी। यात्रियों के हिसाब से यह वृद्धि मात्र एक पैसा प्रति यात्री होगी। वेदव्यास के मुताबिक सीएनजी के दाम बढ़ने के बावजूद यह पेट्रोल के मुकाबले 62 फीसदी बचत देगी। डीजल से चलने वाले वाहनों के मुकाबले नए दाम पर भी सीएनजी में 23 प्रतिशत का लाभ होगा।
नई टेलीकॉम नीति : बदलेगा स्पेक्ट्रम आवंटन का तरीका
पिछले साल दूरसंचार क्षेत्र की घटनाओं ने आम जनता के मन में इसकी काफी नकारात्मक छवि बना दी है। नए साल में संचार व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कपिल सिब्बल इसे बदलेंगे। उन्होंने नए वर्ष के पहले ही दिन अपने मंत्रालय के लिए अगले सौ दिनों का एजेंडा पेश कर दिया है। इसमें देश के डाकघरों की तस्वीर बदलने के साथ ही स्पेक्ट्रम आवंटन की पूरी नीति में बदलाव करना शामिल है। सिब्बल ने यहां संवाददाता सम्मेलन में बताया कि सरकार नेशनल टेलीकॉम पॉलिसी, 2011 लाएगी, जो दूरसंचार नीति, 1999 का स्थान लेगी। अगले कुछ दिनों के भीतर ही स्पेक्ट्रम बांटने, इसका शुल्क तय करने, स्पेक्ट्रम का कारोबार करने, दूरसंचार कंपनियों के बीच विलय व अधिग्रहण करने संबंधी मौजूदा नियमों को साफ व पारदर्शी बनाने के लिए विभिन्न पक्षों से बातचीत शुरू की जाएगी। इसके लिए दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की सिफारिशों को भी ध्यान में रखा जाएगा। साथ ही अंतरिक्ष विभाग, रक्षा मंत्रालय व सूचना व प्रसार विभाग व अन्य सरकारी कंपनियों से अतिरिक्त स्पेक्ट्रम हासिल करने के लिए सभी संबंधित मंत्रालयों से बातचीत शुरू की जाएगी। उन्होंने वादा किया कि अगले सौ दिनों के भीतर 3जी सेवाएं पूरी तरह से चालू हो जाएंगी। साथ ही संचार मंत्री ने ब्लैकबेरी विवाद का निपटारा करने का भी लक्ष्य तय किया है। सिब्बल के इस एजेंडे में सबसे ज्यादा ध्यान डाकघरों की दशा व दिशा सुधारने पर दिया गया है। अगले सौ दिनों के भीतर देश के 9 हजार 600 डाकघरों को कंप्यूटर से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। अभी तक देश के 26 हजार डाकघरों में से 14 हजार डाकघर कंप्यूटरीकृत हैं। डाकघरों को सभी प्रकार की वित्तीय सेवाएं (बैंकिंग व बीमा से संबंधित) देने की योजना के तहत अगले सौ दिनों में ठोस कदम उठाए जाएंगे। साथ ही एटीएम, वेब-पोर्टल व कॉल सेंटर के जरिए डाकघर चौबीसों घंटे काम कर सकेंगे। अगले सौ दिनों के भीतर डाकघर प्री-पेड कार्ड वितरित करना शुरू कर देंगे। डाक विभाग ने इस सेवा के लिए आइसीआइसीआइ, आइडीबीआइ और एचएसबीसी का चयन किया है। पार्सल सेवा को बेहतर बनाने के लिए एक किलोग्राम, 2.5 किलोग्राम और पांच किलोग्राम के पार्सल बॉक्स उपलब्ध कराए जाएंगे। ग्राहकों को अपनी स्पीड पोस्ट की जानकारी मोबाइल फोन के जरिए प्राप्त करने की सुविधा शुरू की जाएगी। सिब्बल ने देश को हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग का हब बनाने के लिए भी कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने का लक्ष्य रखा है। इसमें ग्रामीण महिलाओं को डिजिटली साक्षर बनाने के लिए कार्यक्रम और जिला स्तर पर एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करना शामिल है, जो स्थानीय स्तर पर ई-गवर्नेस को बढ़ावा देगा।
Saturday, January 1, 2011
चीनी आयात पर फिर लगेगा 60 फीसदी शुल्क
देश में चीनी का उत्पादन मांग के मुकाबले अधिक रहने की संभावना है। ऐसे में सरकार ने शुक्रवार को चीनी के आयात पर शून्य शुल्क व्यवस्था खत्म करने का फैसला कर लिया है। इससे चीनी के आयात पर फिर से 60 प्रतिशत शुल्क लागू हो जाएगा। चीनी वर्ष 2008-09 (अक्टूबर-सितंबर) में उत्पादन काफी घट गया था। इसके चलते देश में चीनी की कीमतें पिछले साल जनवरी की शुरुआत में 50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थीं। चीनी के दामों को काबू में लाने की खातिर वर्ष 2009 की शुरुआत में आयात शुल्क खत्म कर दिया गया था, ताकि घरेलू बाजार में इसकी आपूर्ति बढ़े। इससे पहले चीनी आयात पर 60 प्रतिशत शुल्क लगता था। शुल्क मुक्त आयात की व्यवस्था 31 दिसंबर, 2010 तक लागू थी। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि शुल्क मुक्त आयात की अधिसूचना शुक्रवार को खत्म हो रही है। मौजूदा हालात को देखते हुए अब नई अधिसूचना जारी करने की कोई जरूरत नहीं है। इससे स्वत: ही 60 प्रतिशत शुल्क लागू हो जाएगा। अगर आगे चलकर जरूरत पड़ी तो सरकार फिर आयात शुल्क में कटौती कर सकती है। वर्ष 2008-09 में देश में चीनी का उत्पादन घटकर 1.47 करोड़ टन पर आ गया था, जबकि सालाना मांग 2.3 करोड़ टन की है। घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए फरवरी, 2009 से अब तक भारत करीब 60 लाख टन चीनी का आयात कर चुका है। वर्ष 2009-10 में चीनी उत्पादन सुधरकर 1.90 करोड़ टन पर पहुंच गया, लेकिन मांग के मुकाबले यह कम था। हालांकि चालू चीनी वर्ष में उत्पादन बढ़कर 2.45 करोड़ टन पर पहुंचने की संभावना है। इसके अलावा आयातित चीनी का भंडार भी बचा हुआ है। यानी खपत के मुकाबले चीनी की घरेलू उपलब्धता अधिक रहेगी। इसी को देखते हुए ही सरकार ने चीनी में वायदा कारोबार की भी अनुमति दे दी है। यह अलग बात है कि खुदरा बाजार में चीनी के दाम तीन महीनों में 21 फीसदी तक बढ़ चुके हैं। फिलहाल इसकी खुदरा कीमतें 34-35 रुपये प्रति किलो के आसपास हैं।
राजकोषीय घाटे में अच्छी खासी कमी
थ्रीजी स्पेक्ट्रम की नीलामी से अच्छी आय और उम्मीद से ज्यादा राजस्व वसूली के चलते केंद्र के राजकोषीय घाटे में जबर्दस्त कमी आई है। अप्रैल-नवंबर, 2010 में राजकोषीय घाटा 39.08 फीसदी घटकर 1.86 लाख करोड़ रुपये रह गया। पिछले साल की समान अवधि में यह 3.06 लाख करोड़ रुपये था। सरकारी खजाने में जिस तेजी से पूंजी आई, उतनी तेजी से खर्च नहीं की गई, इसलिए भी राजकोषीय घाटे में कमी आई। बैंकिंग प्रणाली में मौजूदा नकदी की कमी के कारणों में एक यह भी कारण शामिल है। समीक्षाधीन अवधि में केंद्र सरकार का परिव्यय 15 फीसदी बढ़कर 6.90 लाख करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले यह 6.21 लाख करोड़ रुपये था। वर्ष 2009-10 में सरकार का राजकोषीय घाटा सकल बजटीय अनुमान का 76.4 फीसदी रहा। महालेखा नियंत्रक के मुताबिक चालू वित्त वर्ष के लिए सकट बजटीय घाटा 3.81 लाख करोड़ रुपये अनुमानित था, जबकि अप्रैल-नवंबर, 2010 में यह 1.86 लाख करोड़ रुपये यानी 48.9 फीसदी ही रहा। सरकार ने इन आठ महीनों में करों के रूप में 2.96 लाख करोड़ रुपये जुटाए, जो पूरे वित्त वर्ष के बजटीय लक्ष्य का 55.5 फीसदी है। अप्रैल-नवंबर, 2010 में गैर कर राजस्व 18 लाख करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष के लिए सकल बजटीय अनुमान से भी अधिक है। ऐसा मुख्यत: स्पेक्ट्रम नीलामी से अच्छी आय के कारण हुआ। सरकार को स्पेक्ट्रम नीलामी से लगभग 70 हजार करोड़ रुपये ज्यादा मिले। वर्ष 08 में शुरू हुए वैश्विक मंदी के बाद सरकार ने अर्थव्यवस्था के लिए कई राहत पैकेजों की घोषणा की थी, जिसका असर केंद्र सरकार के राजकोषीय घाटा लक्ष्यों और उपलब्धियों पर रहा।
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