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Sunday, March 13, 2011

जापान की बर्बादी में भारत के लिए संभावनाएं


सदी के सबसे बड़े जलजले के बाद जापान फिर खड़े होने की कोशिशों में जुटा है। दुनिया की इस तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में कंस्ट्रक्शन से संबंधित वस्तुओं की भारी मांग होने की संभावना है। इससे भारतीय कंपनियों को भी बड़े पैमाने पर ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। जापान खाने पीने की चीजों का भी बड़े पैमाने पर आयात कर सकता है और बंपर पैदावार होने की वजह से भारत जापान को खाद्यान्न निर्यात करने की भी बेहतर स्थिति में है। जापान में निर्यात की संभावनाओं को बढ़ता देख सरकार से इस बारे में उपयुक्त कदम उठाने की भी मांग उठने लगी है। निर्यातकों के शीर्ष संगठन फियो के महासचिव ज्ञान प्रकाश उपाध्याय ने बताया कि जापान ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद लंबे समय तक निर्माण कार्य किया था। भूकंप के बाद ऐसे ही आसार बने हैं। भारतीय कंपनियों ने स्टील और सीमेंट सहित अन्य बिल्डिंग मटीरियल उत्पादों में विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना ली है। जापान इन सभी उत्पादों का अब आयात शुरू कर सकता है। लिहाजा सरकार को चाहिए कि वह घरेलू कंपनियों को निर्यात बढ़ाने में सहयोग करे। सबसे ज्यादा संभावना अनाज निर्यात बढ़ने की है। भारत में इस साल अनाज की पैदावार जबरदस्त होने की संभावना है। गेहूं, चीनी व चावल के बंपर उत्पादन से घरेलू बाजार में भंडारण की समस्या और गंभीर हो सकती है। वैश्विक बाजार में फिलहाल जिंसों की कीमतें भी काफी तेज हैं। सरकार को इस स्थिति को समझते हुए घरेलू जरूरतों को पूरा करने का इंतजाम करने के बाद खाद्यान्न निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटा लेना चाहिए। इससे जापान को भी मदद मिलेगी क्योंकि वह एक जगह से बड़ी आपूर्ति ले सकेगा। हाल ही में भारत और जापान के बीच आर्थिक साझेदारी समझौता (सीपा) हुआ है। इससे आपसी कारोबार और तेज हो सकता है। भारत पहले से ही जापान को दालों, गेहूं, अनाज, चीनी व मसालों, सब्जियों, फलों, चाय, काफी, तंबाकू जैसे खाद्य उत्पादों का निर्यात करता रहा है। जापान के बाजार में इन भारतीय उत्पादों की प्रतिष्ठा है। ऐसे में जापान की मदद करते हुए भारत अपने निर्यात को बढ़ा सकता है। वित्त वर्ष 2009-10 में भारत और जापान का द्विपक्षीय कारोबार करीब 10.3 अरब डॉलर का था। जापान को 3.63 अरब डॉलर का निर्यात किया गया था, जबकि आयात 6.73 अरब डॉलर का रहा था। फियो का कहना है कि भूकंप के बाद निर्यात मांग बढ़ने की संभावना से भारत और जापान का द्विपक्षीय कारोबार वर्ष 2012-13 तक 25 अरब डॉलर हो सकता है। वैसे दोनों देशों ने सीपा के तहत वर्ष 2014 तक इसके हासिल होने का लक्ष्य रखा है|

सरकारी हस्तशिल्प मेले में बिक रहे चीनी उत्पाद


हस्तशिल्प उत्सव में भारत में निर्मित उत्पादों को चीन का बताकर बेचे जाने का मामला प्रकाश में आया है। ग्राहकों ने दुकानदारों पर खरीद का बिल न देने का आरोप भी लगाया है। इससे न केवल यहां आने वाले ग्राहक खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं, बल्कि सरकार को भी टैक्स का चूना भी लगाया जा रहा है। यही नहीं यहां बिक रहे के बजाए चीन में बने उत्पाद बिक रहे हैं। हस्तशिल्प व वस्त्र मंत्रालय के सौजन्य से हमीरपुर के 9 मार्च से शुरू हुए हस्तकला उत्सव में बड़ी संख्या में हस्तकला शौकीन पहुंच रहे हैं। 18 मार्च तक चलने वाले इस उत्सव में कई राज्यों के व्यापारी हिस्सा ले रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि यहां स्थानीय उत्पादों के अलावा कई स्टालों पर चीन में बने सामान को भारतीय कंपनियों द्वारा निर्मित बता कर बेचा जा रहा है। इससे ग्राहक सांसत में हैं। मेले में चीन निर्मित इलेक्ट्रानिक उत्पाद के अलावा सौ रुपये से लेकर दस हजार रुपये तक के उत्पाद बिक रहे हैं मगर इस सामान की कोई गारंटी नहीं है। सामान खरीदने के बाद उसमें कोई खराबी होने पर उसका खामियाजा ग्राहक को खुद ही भुगतना होगा। व्यापारियों द्वारा कानून की अवहेलना कर सरकार को लाखों रुपये के टैक्स का चूना लगाया जा रहा है। उत्सव में मांगने के बावजूद सामान का बिल नहीं दिया जा रहा है। उत्सव में आए कई लोग बिल न मिलने पर व्यापारियों से उलझते देखे गए। उपभोक्ता संरक्षण संगठन के अध्यक्ष एडवोकेट सुशील शर्मा ने कहा कि नियमानुसार सामान का बिल दिया जाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हो रहा है तो इससे सरकार को चूना लग रहा है। वहीं, जिला मुख्यालय में चल रहे हस्तकला उत्सव में सरेआम नियमों का उल्लंघन हो रहा है मगर कार्रवाई करने के बजाए प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। आबकारी एवं कराधान आयुक्त एससी पटियाल का कहना है कि हस्तकला उत्सव शुरू होने से पहले हर व्यापारी को बिल देने के आदेश दिए गए थे। यदि सामान का बिल नहीं दिया जा रहा है तो छानबीन कर कार्रवाई की जाएगी। उपायुक्त राजेंद्र सिंह ने बताया कि हस्तकला उत्सव हर साल लगाया जाता है। उत्सव में भारतीय हस्तकला की जगह चीन में बना सामान बेचने व सामान के बदले बिल न देने के संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली है। अगर ऐसा है तो छानबीन करवाई जाएगी|