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Friday, February 18, 2011

1700 करोड़ का अवैध सिगरेट का कारोबार


देश में सिगरेट पर अत्यधिक उत्पाद शुल्क से नकली सिगरेट कारोबार को बढ़ावा मिला है और इसका बाजार 1,700 करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है।  उधोग मंडल एसोचैम द्वारा कराए गए एक अध्ययन के मुताबिक, मात्रा के लिहाज से भारत में 2004 से 2009 के बीच अवैध सिगरेट का बाजार 57.7 प्रतिशत तक बढ़ गया है। 

इस अध्ययन पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए टोबैको इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के निदेशक उदयन लाल ने कहा कि सिगरेट पर अत्यधिक उत्पाद शुल्क दो नंबर का सिगरेट कारोबार करने वालों को एक बहुत आकषर्क अवसर उपलब्ध कराता है। रपट के मुताबिक भारत में नकली सिगरेट का सालाना कारोबार अनुमानित 42.5 करोड़ डालर (1,700 करोड़ रुपए) का है जिससे 50 लाख तंबाकू किसानों की रोजी रोटी प्रभावित हो रही है.

Tuesday, February 15, 2011

मुद्रास्फीति की रफ्तार पर ब्रेक


नई दिल्ली। गेहूं और चीनी के घटते दाम ने मुद्रास्फीति की मजबूती पर अंकुश लगा दिया। थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित सकल मुद्रास्फीति जनवरी में मामूली गिरावट के साथ 8.23 प्रतिशत रह गई। हालांकि, फल एवं सब्जियों के दाम में अभी भी मजबूती बनी हुई है।

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने जनवरी में सकल मुद्रास्फीति में एक महीना पहले की तुलना में 0.20 प्रतिशत की गिरावट आने पर कहा कि मार्च तक यह और घटकर सात प्रतिशत पर आ जाएगी। एक महीना पहले दिसंबर में सकल मुद्रास्फीति 8.43 प्रतिशत रही थी। उधर, आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि मुद्रास्फीति अभी भी रिजर्व बैंक के पांच से छह प्रतिशत के अनुमानित दायरे से काफी ऊपर है, ऐसे में केन्द्रीय बैंक 17 मार्च को आने वाली मध्य तिमाही समीक्षा में नीतिगत दरों में और वृद्धि कर सकता है।

जनवरी के मुद्रास्फीति के आंकडों के अनुसार थोक मूल्यों में हुई घटबढ़ के मुताबिक चीनी एक साल पहले की तुलना में करीब 15 प्रतिशत सस्ती हो गई। दालों में 12.78 प्रतिशत और गेहूं का दाम करीब पांच प्रतिशत नीचे बोला जा रहा है। आलू के दाम भी सवा प्रतिशत तक नीचे बोले जा रहे हैं। हालांकि, आंकडे बताते हैं कि आम आदमी को अभी ज्यादा राहत नहीं है। उसके रोजमर्रा के इस्तेमाल की कई वस्तुओं के दाम अभी भी ऊंचे बने हुए हैं। दूध, सब्जियां और कई तरह के फलों के दाम उच्च स्तर पर हैं। सब्जियों के दाम एक साल पहले की तुलना में अभी भी 65 प्रतिशत तक ऊंचे हैं।

पिछले साल की तुलना में प्याज के दाम दोगुने के करीब हैं जबकि फलों में 15 प्रतिशत की मजबूती बनी हुई है। अंडा, मांस और मदली के दाम भी 15 प्रतिशत तक ऊंचे बोले जा रहे हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि उम्मीद कर रहा हूं कि मार्च अंत तक यह :मुद्रास्फीति: सात प्रतिशत के आसपास होगी। उन्होंने कहा कि आने वाले महीने में मुद्रास्फीति वैश्विक घटनाक्रम और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में आने वाले उतार चढ़ाव पर निर्भर करेगी। इसका भी असर होगा कि कच्चे तेल का विश्व बाजार कैसा व्यवहार करता हैं। जनवरी में ईंधन और उूर्जा के दाम में भी 11. 41 प्रतिशत की मजबूती रही। इस दौरान पेट्रोल के दाम में 27. 37 प्रतिशत तक की तेजी रही है।

पेट्रोल, डीजल और दूसरे पेट्रोलियम उत्पादों के दाम यदि अंतर्राष्ट्रीय बाजार के अनुरुप बढाए गए तो इस समूह में और तेजी आ सकती है। कच्चे तेल के दाम हाल ही में 100 डालर प्रति बैरल से उूपर निकल गए थे। देश में पिछले एक साल से मुद्रास्फीति की दर काफी ऊंची बनी हुई है और यह 8 प्रतिशत से उूपर चल रही है। हालांकि, यह काबिले गौर है कि नवंबर 2010 में मुद्रास्फीति के शुरुआती आंकडे 7.48 प्रतिशत जारी किए गए थे, संशोधित अनुमान में यह बढ़कर 8.08 प्रतिशत हो गए। रिजर्व बैंक पिछले एक साल से महंगाई को काबू में रखने के लिए नकदी की स्थिति पर लगातार शिकंजा कसे हुए है।

विशेषज्ञों का मानना है कि केन्द्रीय बैंक आने वाले दिनों में मौद्रिक नीति में और सख्ती कर सकता है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष सी. रंगराजन ने कहा कि मुद्रास्फीति के मौजूदा स्तर को देखते हुए रिजर्व बैंक को कदम उठाना होगा। यह अभी भी उच्चस्तर पर है, इस दिशा में केन्द्रीय बैंक को कदम उठाना चाहिए। इसके बाद अपेक्षित परिणाम मिल सकते हैं।

Friday, February 11, 2011

पश्चिमी दुनिया में बढ़ा भारत का रुतबा


मशहूर बाजार सर्वेक्षण और वित्तीय एवं बैंकिंग सेवाएं देनेवाली कंपनी मॉर्गन स्टैनली के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेम्स गोरमैन ने दो वर्षो की मंदी के बाद विकसित अर्थव्यवस्थाओं की हालत में सुधार होने से पूंजी निवेश का प्रवाह पश्चिमी देशों की ओर लौटने के बावजूद भारत का आकर्षण बरकरार रहने का विश्वास जताया है। साथ ही यह चमक बरकरार रखने के लिए भारत को बढ़ती कीमतों पर काबू में रखने की सलाह दी है। गौरतलब है कि वर्ष2008 में वैश्विकवित्तीय संकट से पैदा हुई मंदी के जख्म सहला रही पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं में सुधार का दौर फिलहाल जारी है। चिंता जताई जाने लगी है कि भारत जैसी उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं इससे नुकसान उठा सकती हैं, क्योंकि विकसित अर्थव्यवस्थाओं पर उोगजगत का भरोसा लौटने लगा है। हाल में भारत के दौरे पर आए गोरमैन ने कहा कि जिन कारणों से भारत 2009 और 2010 में सभी निवेशकों का पसंदीदा बाजार रहा, वे अब भी अपनी जगह कायम हैं। अब भारत को इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने पर गौर करने की जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी कंपनी के लिए भारत शीर्ष प्राथमिकता वाला क्षेत्र है।

जानकारी के मुताबिक, मॉर्गन स्टैनली भारत में होलसेल बैंकिंग लाइसेंस हासिल करने की योजना बना रही है। इस लाइसेंस के मिल जाने से कंपनी कॉरपोरेट ग्राहकों को बेहतरीन सेवाएं मुहैया करा सकेगी। भारत में कंपनी ने अपने कर्मचारियों की तादाद बढ़ाने की तैयारी भी की है। फिलहाल इसमें 1,600 कर्मचारी काम कर रहे हैं। वर्ष 2010 की शुरुआत में मॉर्गन स्टैनली का जिम्मा संभालने वाले ऑस्ट्रेलियाई मूल के गोरमैन ने कहा कि भारत सरकार के बजट को घाटे के फंदे से बाहर निकालना महत्वपूर्ण है और मुद्रास्फीति की औसत दर पर भी ध्यान देने की जरूरत है जो फिलहाल काफी ज्यादा है। इससे बेहतर होता कि आर्थिक विकास की दर कुछ नीचे रहती और मुद्रास्फीति दर काबू में रहती। पिछले साल 8.6 फीसदी के आर्थिक विकास के बल पर भारत ने 29 अरब डॉलर का रिकॉर्ड विदेशी पोर्टफोलियो निवेश आकर्षित किया, लेकिन अब उस पर कीमतों की बढ़ती आंच का असर होने लगा है। थोक मूल्य सूचकांक से आंकी जाने वाली मुद्रास्फीति की दर चालू वित्त वर्ष के दिसम्बर महीने के लिए 8.4 फीसदी दर्ज की गई थी, जो रिजर्व बैंक के संशोधित 7 फीसदी मुद्रास्फीति लक्ष्य से ज्यादा है। प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने भी पिछले सप्ताह देश के अर्थतंत्र के लिए इसे एक गंभीर खतरा माना। रिजर्व बैंक बीते 12 महीने में सात बार नीतिगत दरों में इजाफा कर चुका है। अनुमान जताया जा रहा है कि इस साल नीतिगत दरों में एक फीसदी का इजाफा और किया जाएगा।

चीन ने भी इसी हफ्ते नीतिगत दरें बढ़ाने का फैसला किया, जो अक्टूबर के बाद से तीसरी बढ़ोतरी है। काफी समय तक वकालत कर चुके गोरमैन मैकेंजी एंड कंपनी के वित्तीय सलाहकार भी रहे हैं। उनके कार्यकाल में मॉर्गन स्टैनली दुनिया का सबसे बड़ा ब्रोकरेज हाउस बन कर उभरा है, जिसने वर्ष 2009 में सिटी बैंक समूह के स्मिथ बारने ब्रोकरेज बिजनेस के अधिग्रहण में बड़ी भूमिका निभाई थी। पिछले साल गोल्डमैन सैक्स को पीछे छोड़ते हुए मॉर्गन दुनिया की शीर्ष विलय एवं अधिग्रहण सलाहकार बन गई, क्योंकि कंपनियों के बीच आर्थिक भरोसा लौटने से सौदे संबंधी गतिविधियों में इजाफा हुआ। गोरमैन ने अनुमान जताया कि इस वर्ष विलय एवं अधिग्रहण गतिविधियों में और तेजी आएगी, क्योंकि वैश्विक अर्थतंत्र में हो रहे तेज विकास की वजह से माहौल सकारात्मक बन रहा है और कंपनियों के पास मंदी के समय सहेजकर रखी गई नकदी मौजूद है। उनकी यह मान्यता पिछले महीने सही भी साबित हो चुकी है। इस वर्ष के पहले ही महीने में विलय एवं अधिग्रहण गतिविधियों ने बीते 11 में सबसे व्यस्त महीना रहा था। इसके बावजूद लोगों के मन की शंकाएं खत्म नहीं हुई हैं। वे पूछ रहे हैं कि कहीं वैश्विक सुधार का भरोसा मृगमरीचिका तो नहीं है? जल्द ही कहीं गुब्बारा फूट तो नहीं जाएगा? गोरमैन ने दावा किया कि मंदी के दूध से जिनका मुंह जल चुका है उनका अतिरिक्त सावधानी बरतना स्वाभाविक है लेकिन पिछले साल आर्थिक परिदृश्य पर निराशा जताने वाले लोग गलत साबित हुए थे। यूनान, पुर्तगाल या स्पेन के हालात ने लोगों को डरा तो दिया था लेकिन उनसे अमेरिका की तरह सब-प्राइम संकट की स्थिति नहीं बनी और उन तीनों देशों को राहत पैकेज देकर संकट से उबार लिया गया। यह उतना बुरा नहीं रहा, जितना कि लोगों ने सोचा था। इन तीनों देशों में से कोई भी बुरे वक्त की शुरुआत का कारण हो सकता था, लेकिन तीनों ने आशंकाओं को झुठलाते हुए बेहतर स्थिति हासिल कर ली। इसके साथ ही वित्तीय सेक्टर में विश्वास बढ़ाने के लिए इन देशों की सरकारों ने सक्रिय दखलअंदाजी की। नए नियमों तथा ज्यादा पूंजी के साथ उन्हें मजबूत बनाने से सुधार प्रक्रिया में मदद मिलेगी।

बहरहाल, गॉरमैन कुछ खतरे सामने आने की संभावना से इन्कार नहीं करते हैं। उन्हें लगता है कि मंदी के झटके बाद वित्तीय तंत्र को शुद्घ और बेहतर बनाने में मदद मिली है। कई चीजें दुरुस्त हुई हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था तुलनात्मक रूप से स्थिर है। इसके बावजूद मिd तथा अन्य खाड़ी देशों में चल रहा राजनीतिक बवंडर इस सफर की दिशा बदलने का माद्दा रखते हैं। यह एक संयोग ही है कि सबसे मध्य-पूर्व के ज्यादा स्थिर मुल्कों में से एक मिd में इन दिनों सत्ता बदलने की उठा-पटक चल रही है।
  

गैस की कालाबाजारी मौत का सबब


इस समय बाजार में चाइनीज रेगुलेटर और गैस पाइप आसानी से उपलब्ध हैं। कम पैसों में यह खूब बिक भी रहे हैं। दुकानदार भी मुनाफा अधिक होने की वजह से इन्हें बेचने में खूब इंट्रेस्ट दिखा रहे हैं। जबकि यह इतने खतरनाक हैं कि कभी भी फट सकते हैं। आग का गेाला बन लोगो की मौत का कारण भी यही चीनी रेगुलेटर और गैस पाइप बन रहे हैं। नाका, अमीनाबाद, गणेशगंज की बाजार में चीनी रेगुलेटर 100 से 120 रुपए और गैस पाइप 30 से 50 रुपए में मिल रहे हैं।

जिला पूर्ति विभाग के आंकड़े

वर्ष 2010 में आपको बताते हैं कि किस महीने में जिला पूर्ति विभाग ने कितनी जगह छापे मारे और कितने मामले दर्ज किए। जनवरी माह में 2, फरवरी माह में 16, मार्च में कोई काम ही नहीं हुआ, अप्रैल में 8, मई में 4, जून में सन्नाटा रहा, जुलाई में 8, अगस्त में 3, सितंबर में 9, अक्टूबर में 9, नवबंर में 6 और दिसंबर में 10 जगह छापे मारे गए। इसी प्रकार वर्ष 2011 में जनवरी माह से लेकर अब तक कुल पांच छापे मारे गए और गैस की कालाबाजारी के मामले में 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

कालाबाजारी के खिलाफ विशेष अभियान

पुलिस और प्रशासन के सहयोग से जिला पूर्ति विभाग गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी के खिलाफ हर वर्ष एक अभियान चलाता है। इस वर्ष भी एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। हर रोज आठ से दस लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जा रही है। लोग कम पैसों के फेर में डुप्लीकेट रेगुलेटर और गैस पाइप का प्रयोग कर रहे हैं। लोगों को कंपनी के बने हुए सामान का प्रयोग करना चाहिए।
(
बुद्घि भाष्कर दुबे, जिला पूर्ति अधिकारीनीरज मिश्र)

कालाबाजारी ही मौत का सबब बन रही। हर महीने गैस सिलेंडर फटने और आग लगने के हादसे हो रहे हैं। अब तक कितने ही लोग अपनी जान गंवा चुके हैं तो कई लोगों को इन हादसों ने जिदंगी भर का दर्द दे दिया है। जब भी ऐसे हादसे होते हैं, जिला प्रशासन से लेकर पुलिस तक सिर्फ खानापूरी ही होती है। कुछ लोगों को आरोपी बनाकर एफआईआर लिखाई जाती है। इसके बाद सब कुछ कागजों में ही बंद हो जाता है। बुद्घवार को आशियाना के फाऊंटेन प्लाजा में हुआ हादसा गैस कालाबाजारी का ऐसा ही नमूना है। रेगुलेटर से लेकर गैस पाइप तक सब कुछ डुप्लीकेट है। किसी के भी नाम पते पर गैस मात्र कुछ ही रुपए घूस देने पर आसानी से उपलब्ध है। गैस सिलेंडरों से लेकर उसके रेगुलेटर और पाइप आदि के कालाबाजारी का यह खेल बाजार में पूरी तरह से छाया हुआ है।

जिला पूर्ति विभाग के आंकड़े बताते हैं कि पिछले वर्ष 2010 से लेकर 10 फरवरी 2011 तक कालाबाजारी के 77 मामले उसके यहां दर्ज किए गए। इसके लिए जिला पूर्ति विभाग ने छापे मारे और हजारों अवैध गैस सिलेंडर भी जब्त किए। लगभग 40 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 35 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई। यही आंकड़े विधान सभा में विपक्ष के प्रश्नों के जवाब में प्रदेश सरकार ने प्रस्तुत किए हैं। जिला पूर्ति विभाग का यह भी दावा है कि उसने ऐसे लोगों के खिलाफ एक विशेष अभियान चला रखा है। हर रोज लगभग आठ से दस लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जा रही है, लेकिन उसके दावे कितने सच हैं यह उसी के विभाग के तैयार किए गए आंकड़े बता रहे हैं। यह सिर्फ शहर के आंकड़े हैं। इससे आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि जिला पूर्ति विभाग ने शहर में गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी रोकने के लिए 13 महीने 10 दिनों में कुल कितना काम किया गया है। शहर की छोटी सी चाय की दुकान से लेकर रेस्टोरेंट तक में डोमेस्टिक गैस सिलेंडरों का प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है। शहर के छोटे बड़े रेस्टोरेंट और फूड की कई ऐसी दुकाने हैं जहां एक कॉमर्शियल कनेक्शन के सहारे डोमेस्टिक गैस सिलेंडरों का प्रयोग किया जाता है। कॉमर्शियल गैस सिलेंडर सिर्फ दिखावे के लिए होते हैं। प्रयोग डोमेस्टिक गैस सिलेंडरों का किया जाता है।

नाका, इंदिरानगर, गणेशगंज, तेलीबाग, राजाजीपुरम, आलमबाग और अमीनाबाद बाजार में गैस रेगुलेटर से लेकर गैस पाइप तक सब कुछ कम पैसों में डुप्लीकेट और चाइनीज सामान उपलब्ध हैं। कम ही दुकानें ऐसी होंगी जहां पर मानक के अनुरूप रेगुलेटर और पाइप मिल रहे हों। जिला पूर्ति कार्यालय हर रोज छापे की कार्रवाई करता हो लेकिन उसका ध्यान इस ओर शायद ही कभी गया हो। यही डुप्लीकेट और चाइनीज गैस का सामान लोगों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है।

एजेंसी से भी कम दाम हैं

अमीनाबाद गैस एजेंसी के मालिक रवि बताते हैं कि जिनके कनेक्शन होते हैं एजेंसी से उन्हीं को रेगुलेटर और पाइप दिए जाते हैं। अगर किसी का रेगुलेटर डैमेज हो जाता है तो उसे 250 रुपए में नया रेगुलेटर दिया जाता है। इसके अलावा गैस का पाइप 150 से 170 रुपए का मिलता है। इन्हें चूहे भी कुतर नहीं सकते। यह पूरी तरह से कंपनी के बने होते हैं। जिस कंपनी की गैस एजेंसी होती है उस कंपनी और आईएसआई मार्का के रेगुलेटर और गैस पाइप बने होते हैं। यह गैस एजेंसियों के अलावा बाजार में उपलब्ध नहीं होते। जबकि बाजार में मिलने वाले रेगुलेटर 150 से 200 रुपए तक में आसानी से मिल जाते हैं। गैस पाइप 50 रुपए से लेकर 70 रुपए तक में मिल जाते हैं। दुकानदार जरूर इनकी एक साल की गारंटी देते हैं लेकिन जानकारों का कहना है कि इनकी कोई गारंटी नहीं होती। इनमें से ज्यादातर डुप्लीकेट ही होते हैं। यह कभी भी डैमेज हो सकते हैं और यही हादसे की वजह बन जाते हैं।

एक सिलेंडर चार कनेक्शन

शहर में सैकड़ों ऐसी दुकाने और रेस्टोरेंट हैं जहां मानक के विपरीत गैस सिलेंडरों का प्रयोग किया जाता है। एक गैस सिलेंडर से कई बड़े चूल्हों का कनेक्शन कर प्रयोग में लाया जाता है। वह भी जुगाड़ कर। इसके लिए यह दुकानदार और रेस्टोरेंट वाले एक मेन कनेक्शन तैयार करते हैं। और एक बड़े से पाइप के सहारे लगभग चार से पांच चूल्हों को जोड़ा जाता है। यह इतना खतरनाक होता है कि कभी भी बड़े हादसे का सबब बन जाता है। ऐसे दुकानदारों और रेस्टोरेंट के मालिकों को गैस ऐजेंसियों से सीधा संपर्क होता है। कुछ लोग डिलेवरी मैन को कुछ अधिक पैसे देकर गैस सिलेंडर लेते हैं।