भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मदमस्त हाथी बताया है। उनका मानना है कि ईस्ट एशिया अगर चीता है और चीन ड्रैगन, तो भारतीय अर्थव्यवस्था मदमस्त हाथी है। पूरे विश्व में हाथी जैसा कोई जानवर नहीं है। आरबीआइ के गवर्नर का संकेत उस कहावत की तरफ भी था, जिसमें कहा जाता है हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और। चंडीगढ़ स्थित सेंटर फॉर रिसर्च इन रूरल एंड इंडस्टि्रयल डेवलपमेंट में आयोजित समारोह में गवर्नर ने कहा कि भले ही यूरोप मंदी के चक्रव्यूह में है, लेकिन भारत सभी बाधाएं पार करने में सक्षम है। सुब्बाराव ने देश की दस चुनौतियों की तरफ लोगों का ध्यान खींचा। जीडीपी में सबसे कम भूमिका अदा करने वाले कृषि सेक्टर को उन्होंने सबसे बड़ी चुनौती बताया। सुब्बाराव का कहना था कि भले ही कृषि सेक्टर की जीडीपी में 15 फीसदी हिस्सेदारी है, लेकिन यह सेक्टर सर्वाधिक लोगों को रोजगार मुहैया कराता है। अन्य सेक्टरों के मुकाबले कृषि क्षेत्र में 53 फीसदी रोजगार मिलता है। उनका मानना है कि वर्तमान में दूसरी कृषि क्रांति की आवश्यकता है। कृषि के अलावा इंडस्ट्री जीडीपी ग्रोथ में 20 फीसदी और सर्विस सेक्टर 65 फीसदी योगदान डालता है, लेकिन इंडस्ट्री 12 फीसदी और सर्विस सेक्टर महज 35 फीसदी रोजगार के अवसर पैदा करता है। सुब्बाराव ने कहा कि देश की दूसरी बड़ी चुनौती रोजगार के अवसरों को बढ़ाना है। आगामी 20 वर्षो में 250-300 मिलियन हाथों को रोजगार के अवसर प्रदान करने की आवश्यकता है। उन्होंने देश में उत्पादकता को बढ़ाने को तीसरी और शहरीकरण को मैनेज करने को चौथी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि चीन में 1997 में शहरीकरण की दर 32 फीसदी थी, जो 2010 में बढ़कर 50 फीसदी हो गई। जबकि भारत में 1991 में यह दर 26 फीसदी थी, जो 2011 में महज 31 फीसदी है। सुब्बाराव ने मानव संसाधन सेक्टर को अपडेट करने को चुनौती बताया। यूएनडीपी ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स 2011 में भारत की रैंकिंग 187 में 134 है। लिहाजा, इस सेक्टर को अपडेट करने की जरूरत है। उन्होंने देश में वित्तीय संस्थाओं के विस्तार न होने को भी चुनौती बताया। उनका कहना था कि आज भी देश में बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है, जो बैंक नहीं जाता है। कुछ है जिनका बैंक में अकाउंट तो है, लेकिन वह उसे ऑपरेट नहीं करते हैं। उन्होंने ग्लोबलाइजेशन को भी चुनौती बताया। ईधन, खाद और सिंचाई पर सब्सिडी सही नहीं चंडीगढ़, एजेंसी : राजकोषीय स्थिति सुगठित करने और सरकार के घाटे को कम करने की वकालत करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने शुक्रवार को ईधन, उर्वरक और सिंचाई के लिए दी जाने वाले सब्सिडी को खराब बताते हुए इस गैरउत्पादक खर्च को खत्म करने को कहा। पीएन हक्सर स्मृति व्याख्यान में सुब्बाराव ने कहा कि वित्तीय सुदृढ़ीकरण का खाका तैयार करते हुए हमें वित्तीय समायोजन का भी ध्यान रखना होगा। ऐसे खर्च को समाप्त करने होंगे जो गैरउत्पादक हैं। सुब्बाराव ने ईधन सब्सिडी को खराब बताते हुए कहा कि एलपीजी सिलेंडर खरीदते समय आपको प्रत्येक बार 300 रुपये की सब्सिडी मिलती है। यही नहीं, अंबानी और बिड़ला को भी हर बार सिलेंडर की खरीद पर यह सब्सिडी मिलती है। इसके बाद उर्वरक सब्सिडी आती है। खाद सब्सिडी की वजह से भूमि खराब हो रही है। इसकी वजह से हमें सिंचाई के लिए सब्सिडी देनी पड़ती है। रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि कुछ अच्छी सब्सिडी भी हैं। मसलन स्कूल जाने वाली लड़कियों को साइकिल, गांवों में लड़कियों के स्कूल में शौचालय बनाना। ये च्च्छी सब्सिडी की गिनती में आते हैं।
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Saturday, November 26, 2011
रुपया 19 पैसे लुढ़का
शेयर बाजार में कमजोरी के रुख और आयातकों की ताजा डालर मांग से अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 19 पैसे कमजोर होकर 52.25:26 रुपए प्रति डालर पर बंद हुआ। पूंजी के सतत बहिप्र्रवाह के साथ साथ विदेशों में डालर में मजबूती के रुख के कारण रुपए पर दबाव बना रहा। इस बीच चंडीगढ़ में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने कहा कि रिजर्व बैंक रुपये के उतार चढ़ाव पर निगाह रखे हुए है। अन्तरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 52.15:16 रुपए प्रति डालर पर कमजोर खुला और तत्काल 52.06 रुपए प्रति डालर के स्तर को छू गया। कारोबार के दौरान यह 52.46 रुपए प्रति डालर तक नीचे जाने के बाद अंत में 52.25:26 रुपये प्रति डालर पर बंद हुआ। बंबई शेयर बाजार का सूचकांक आज 163 अंकों की गिरावट प्रदर्शित करता हुआ बंद हुआ। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 15 नवंबर के बाद से पिछले 18 दिनों में बाजार से करीब एक अरब डालर की निकासी की है जिसए रुपए पर दबाव बढ़ गया। इस बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने संदर्भ दर 52.1665 रुपए प्रति डालर और 69.4263 रुपए प्रति यूरो तय की है। पौंड, यूरो और जापानी येन के मुकाबले रुपए में मजबूती रही।
खुदरा क्षेत्र में एफडीआई से काबू में आएगी महंगाई
भारतीय रिजर्व बैंक ने उम्मीद जताई है कि बहु ब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) से महंगाई को नीचे लाने में मदद मिलेगी। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर डी सुब्बाराव ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘बहु ब्रांड खुदरा क्षेत्र में एफडीआई से निश्चित तौर पर आपूर्ति श्रृंखला को सुधारने में मदद मिलेगी और इससे महंगाई नीचे आएगी।’ केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कल बहु ब्रांड खुदरा क्षेत्र में 51 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति दी थी। इससे वॉलमार्ट जैसे वैिक रिटेलरों को देश के शहरों में बड़े स्टोर खोलने में मदद मिलेगी। सुब्बाराव ने कहा, ‘बहु ब्रांड खुदरा क्षेत्र में 51 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति से देश में विदेशी पूंजी को आकषिर्त करने में मदद मिलेगी। यह एक अच्छा कदम है जिससे देश में सही पूंजी आ पाएगी।’ इससे पहले दिन में सुब्बाराव ने कहा कि मंत्रिमंडल के फैसले से लाजिस्टिक्स में सुधार होगा, बेलगाम हो रही महंगाई काबू में आएगी और इससे देश की 50 फीसद से अधिक की आबादी के जीवनस्तर में सुधार होगा। सुब्बाराव ने बढ़ती महंगाई को सफलता के लिए समस्या बताते हुए कहा कि कृषि उत्पादकता में सुधार कर खाद्य मुद्रास्फीति की समस्या से जड़ से निपटा जा सकता है। रिजर्व बैंक के प्रमुख ने कहा कि स्थिर वृहद आर्थिक वातावरण के लिए महंगाई को पांच फीसद पर लाना और केंद्र और राज्यों के राजकोषीय घाटे को कम करना जरूरी है। केंद्रीय बैंक की दलील फैसले से विदेशी पूंजी आकषिर्त करने में मिलेगी मदद आपूर्ति में आएगा सुधार, 50 फीसद आबादी को होगा लाभ
खुदरा क्षेत्र में एफडीआई से मिलेंगे एक करोड़ रोजगार
सामान्य खुदरा (रिटेल) व्यापार में विदेशी कंपनियों के प्रवेश को लेकर हो रही आलोचानाओं के बीच सरकार ने कहा कि इससे तीन से पांच साल के दौरान एक करोड़ रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे उपभोक्ताओं और किसानों को भी फायदा होगा। साथ ही महंगाई काबू करने में मदद मिलेगी। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने शुक्रवार को यहां संवाददाताओं से कहा कि बहु ब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेश निवेश (एफडीआई) आने से किसानों की उपज का अच्छा दाम मिलेगा और उपभोक्ताओं के लिए बेहतर माल खरीदने के विकल्प हासिल होंगे। इसके साथ ही क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेंगी। नई नीति के तहत बहुब्रांड खुदरा में क्षेत्र में विदेशी निवेशकों को न्यूनतम 500 करोड़ रुपए का निवेश करना होगा, इसमें से 50 प्रतिशत निवेश ग्रामीण क्षेत्र में आधारभूत ढांचा खड़ा करने में करना होगा। उम्मीद है कि कोल्ड स्टोर, प्रसंस्करण केन्द्र और पैकेजिंग सुविधायें विकसित होंगी। शर्मा ने कहा कि इन गतिविधियों में अगले तीन से पांच साल में 60 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा विदेशी कंपनियों के जो स्टोर खुलेंगे उनमें 40 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध होगा। शर्मा ने कहा कि चीन, थाईलैंड, रूस, इंडोनेशिया, ब्राजील और अज्रेंटीना सहित दुनिया के कई देशों में खुदरा क्षेत्र में शत प्रतिशत विदेशी निवेश की अनुमति है। लेकिन भारत ने अपने सामाजिक ढांचे, जरूरतों को देखते हुए इसकी अनुमति दी है। देश की दस लाख अथवा इससे अधिक आबादी वाले शहरों में ही ऐसे स्टोर खोले जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘देश के 8,000 छोटे बड़े शहरों में मात्र 53 शहरों में ही विदेशी खुदरा स्टोर खुल सकेंगे, उनमें भी उनकी 51 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी शेष 49 प्रतिशत भारतीय भागीदार के पास होगी।’ केन्द्र की यूपीए सरकार में सहयोगी तृणमूल कांग्रेस ने सरकार के इस निर्णय का विरोध किया है। तमिलनाडु में इस समय विपक्ष में बैठी डीएमके ने भी सरकार के इस निर्णय पर चिंता व्यक्त की है। मुख्य विपक्षी दल भाजपा खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश के विरोध में है। उसका कहना है कि इससे छोटे व्यापारियों और किराना दुकानदारों का कामकाज प्रभावित होगा। कन्फैडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स शुरू से ही इसका विरोध करता आ रहा है। शर्मा ने कहा, ‘सभी राज्य सरकारों से बात की गई, कई ने समर्थन दिया, कुछ विरोध में भी रहे। पंजाब की अकाली दल सरकार ने केन्द्र सरकार के फैसले का समर्थन किया है। हरियाणा और कई अन्य राज्य सरकार इस निर्णय में केन्द्र के साथ हैं।’ पश्चिम बंगाल के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि बहु ब्रांड खुदरा कारोबार के स्टोर 10 लाख अथवा इससे अधिक आबादी वाले शहरों में ही लगेंगे। पश्चिम बंगाल में इससे अधिक आबादी वाले तीन ही शहर हैं, इसलिए गांव, कस्बों में चलने वाली छोटी किराना दुकानों को इससे नुकसान नहीं होगा। वाणिज्य सचिव प्रदीप कुमार चौधरी ने बताया कि सरकार के इन निर्णयों को लागू करने के लिये अगले सप्ताह दिशानिर्देश जारी कर दिए जाएंगे और एफडीआई प्रस्तावों को मंजूरी दिए जाने की भी उम्मीद है। हालांकि खुदरा क्षेत्र में कितना एफडीआई आ सकता है इस बारे में आनंद शर्मा और वाणिज्य सचिव ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
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