Showing posts with label २२ फरवरी २०१२. Show all posts
Showing posts with label २२ फरवरी २०१२. Show all posts

Monday, February 27, 2012

किसानों को मिलेगा ज्यादा कर्ज


आने वाले दिनों में देश के सभी बैंकों की तरफ से वितरित कुल कर्ज का नौ फीसदी हिस्सा छोटे व सीमांत किसानों को देने की व्यवस्था लागू की जा सकती है। इसके साथ ही सात फीसदी बैंकिंग कर्ज बेहद छोटी औद्योगिक इकाइयों को दिया जाएगा। प्राथमिक क्षेत्र को कर्ज देने संबंधी मौजूदा नियम में बदलाव करने के समय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) इन प्रावधानों को लागू कर सकता है। रिजर्व बैंक ने पिछले वर्ष बैंकों की तरफ से वितरित होने वाले प्राथमिक क्षेत्र को कर्ज देने के मौजूदा नियम में बदलाव के लिए नायर समिति गठित की थी। समिति ने मंगलवार को अपने आरंभिक सुझाव केंद्रीय बैंक को दे दिए हैं। माना जा रहा है कि अगले वित्त वर्ष 2012-13 से नए नियम लागू कर दिए जाएंगे। समिति ने 25 लाख रुपये तक के होम लोन, ग्रामीण इलाकों में आवास मरम्मत के लिए दो लाख रुपये तक के कर्जे व शहरी इलाकों में इस उद्देश्य से पांच लाख रुपये तक के ऋण कर्ज को भी प्राथमिक क्षेत्र में रखने का सुझाव दिया है। समिति ने कहा है कि देश की बहुत बड़ी आबादी तक बैंक नहीं पहुंच पाए हैं। इन तक बैंकिंग सेवा के पहुंचे बगैर आर्थिक विकास नहीं हो सकता है। समिति का कहना है कि कुल वितरित कर्ज का 18 फीसदी कृषि क्षेत्र को मिलना चाहिए। इसमें छोटे व सीमांत किसानों को ज्यादा महत्व दिया जाना चाहिए। यही वजह है कि नौ फीसदी बैंकिंग कर्ज इन किसानों को देने की सिफारिश की गई है। इस व्यवस्था को वर्ष 2015-16 तक लागू करने की बात कही गई है। इसी तरह से वर्ष 2013-14 तक सात फीसदी बैंकिंग कर्ज बेहद छोटे औद्योगिक इकाइयों को देने का सुझाव दिया गया है। विदेश में शिक्षा के लिए 25 लाख रुपये के कर्ज को प्राथमिक क्षेत्र में मानने की सिफारिश की गई है। अभी यह सीमा 20 लाख रुपये की है। घरेलू शिक्षा के लिए 15 लाख रुपये की सीमा तय की गई है।

ज्यादा डरावनी है महंगाई की असली सूरत


सरकार ने मंगलवार को पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर खुदरा कीमत आधारित महंगाई की तस्वीर पेश की है। इसके मुताबिक खुदरा कीमतों के आधार पर जनवरी, 2012 में महंगाई की दर 7.65 फीसदी रही है। इससे साफ है कि महंगाई की यह असली व सटीक तस्वीर ज्यादा डरावनी है। जनवरी, 2012 में थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई की दर 6.55 फीसदी थी। जानकारों का कहना है कि नए सूचकांक को देखते हुए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करने को लेकर सतर्कता बरत सकता है। सांख्यिकी व कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की तरफ से जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआइ) धीरे-धीरे मौजूदा थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआइ) का स्थान ले लेगी। सरकार ने देश के लगभग 600 जिलों के 310 शहरी केंद्रों और 1181 गांवों से विभिन्न उत्पादों की खुदरा कीमतों को जुटाया है। यह प्रक्रिया पिछले एक साल से जारी थी। शहरों के 1114 बाजारों से कीमतें जुटाई गई हैं। इसके आधार पर यह सूचकांक तैयार किया गया है। देश की प्रमुख रेटिंग एजेंसी इकरा की अर्थशास्त्री अदिति नायर मानती हैं कि महंगाई में बहुत सुधार नहीं हुआ है। ऐसे में रिजर्व बैंक उम्मीदों को धता बताते हुए रेपो दर कौ मौजूदा स्तर पर ही बनाए रखेगा। इस दर के आधार पर बैंक आरबीआइ से छोटी अवधि के कर्ज हासिल करते हैं। इसकी वजह से रेपो के हिसाब से वे अपनी ब्याज दरें भी तय करते हैं। अन्य जानकारों ने भी कुछ ऐसी ही राय जताई है। थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर के सात फीसदी से नीचे आने के बाद केंद्रीय बैंक ने रेपो दर घटाने के संकेत दिए थे। मगर खुदरा बाजार के ये आंकड़े बताते हैं कि अर्थव्यवस्था में मांग अभी भी तेज बनी हुई है। साथ ही आने वाले दिनों में महंगे क्रूड का असर भी देश की महंगाई पर नजर आएगा। गांव में अनाज व दूध शहर से महंगे! खुदरा महंगाई के इन आंकड़ों से कई दिलचस्प निष्कर्ष भी सामने आए हैं। इनके मुताबिक, ग्रामीण जनता मोटे अनाजों के लिए शहरों की तुलना में चार गुना ज्यादा कीमत अदा कर रही है। इस साल जनवरी में ग्रामीण इलाकों में अनाजों की खुदरा कीमतों में 3.44 फीसदी की वृद्धि हुई है। शहरों में यह वृद्धि महज 0.79 फीसदी की रही है। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्र में दाल, अंडा, दूध, चीनी, ईंधन वगैरह में महंगाई गांवों में ज्यादा रही है। वैसे, तेल, कपड़े, जूते, सब्जियों में शहरों में ज्यादा महंगाई रही है। समग्र तौर पर जनवरी, 2012 में महंगाई की दर 7.65 रही है। शहरों में सीपीआइ आधारित महंगाई की दर 8.25 और ग्रामीण इलाकों में 7.38 फीसदी रही है। मेघालय सबसे महंगा राज्य इन आंकड़ों से पहली बार यह पता चला कि राज्यों में महंगाई की स्थिति क्या है। जनवरी की बात करें तो सबसे ज्यादा महंगाई मेघालय में देखी गई है। दूसरे स्थान पर कर्नाटक और तीसरे स्थान पर केरल रहा है। इसके बाद गुजरात और तमिलनाडु संयुक्त तौर पर पांचवे स्थान पर हैं। महंगाई के मामले में जम्मू-कश्मीर का स्थान इसके बाद आया है। डब्ल्यूपीआइ से कितनी जुदा दुनिया के अधिकतर देशों में खुदरा मूल्य सूचकांक को ही आधार माना जाता है। देश में लागू मौजूदा थोक मूल्य सूचकांक में खाद्य उत्पादों का हिस्सा महज 14.3 फीसदी है। वहीं, सीपीआइ में इनकी हिस्सेदारी 45 फीसदी से ज्यादा है। साथ ही डब्ल्यूपीआइ में स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे कई सेवा क्षेत्र शामिल नहीं हैं, जबकि इन पर आम जनता काफी खर्च करती है। नए सूचकांक में सेवाओं को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।