Monday, March 28, 2011

पाक को चीनी बेचना चाहता है महाराष्ट्र


महाराष्ट्र ने केन्द्र सरकार से कहा है कि देश में जरूरत से ज्यादा चीनी है और दुनिया के बाजार में चीनी का भाव भी चढ़ा हुआ है, लिहाजा अधिक चीनी के निर्यात की अनुमति दी जानी चाहिए। अगर केन्द्र सरकार ने अनुमति दी तो महाराष्ट्र अपनी चीनी सिर्फ अरब देशों, बांग्लादेश और श्रीलंका के अलावा पाकिस्तान को भी बेचेगा। अभी सरकार ने पांच लाख मिलियन टन चीनी ही निर्यात के लिए खोली है। देश में चीनी का अधिक उत्पादन करने वाले राज्यों में से एक महाराष्ट्र का कहना है कि चीनी को आवश्यक वस्तुओं की सूची से बाहर रखने का भी समय आ गया है। राज्य की मांग है कि अगर सरकार यह कदम उठाती है तो इससे किसानों को गन्ने का सही भाव भी मिल सकेगा और चीनी मिलों की भी हालत सुधरेगी। महाराष्ट्र में अभी गन्ना किसानों को प्रति टन दो हजार रुपए मिल रहे हैं और राज्य का कहना है कि आवश्यक वस्तुओं की सूची से चीनी को हटाकर किसानों को ढाई हजार रुपए प्रति टन का भाव दिया जा सकता है। सहकारिता क्षेत्र में बेहद सफल और गांधीवादी तरीके से चलने वाली पश्चिम महाराष्ट्र की चीनी मिल एसबी थोराट शक्कर कारखाने के अध्यक्ष महादेव कनवाड़े का कहना है कि देश में 2.50 करोड़ टन चीनी का उत्पादन हुआ है और देश में चीनी की खपत सिर्फ 2.30 करोड़ टन है। इसके अलावा पिछले साल की भी काफी चीनी स्टॉक में पड़ी है इसलिए जरूरी है कि देशी खपत से जो ज्यादा चीनी हमारे पास है, उसे कोल्ड ड्रिंक और दूसरी जरूरतों के लिए दूसरे देशों को बेचना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह बाहर चीनी बेचने का उपयुक्त समय है, क्योंकि इस वक्त वहां 40 से 50 रुपए प्रतिकिलो का भाव चल रहा है। मिल के अध्यक्ष ने कहा कि यह डर फिजूल है कि बाहर चीनी बेचने से देश में चीनी की कमी हो जाएगी और उसका दाम बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि भारतीय बाजारों में अभी चीनी के दाम 37 रुपए किलो तक ही रहेंगे, क्योंकि हमारे पास घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए चीनी का पर्याप्त भंडार है। उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों में गन्ने की खेती से विमुख हो रहे किसानों और इस धंधे को घाटे का सौदा बताकर चीनी मिलें बंद करने वालों को सहकारिता क्षेत्र के इस कारखाने ने कुछ अभिनव प्रयोग करके यह समझाने का प्रयास किया है। इससे किसान और मिल चलाने वाले भी खुश रह सकते हैं। इस कारखाने को चलाने वाली सहकारी समिति ने किसानों को आमदनी बढ़ाने के लिए कई तरह के पूरक धंधे करने के लिए प्रेरित किया है। मसलन समिति ने दूध से बनाए जाने वाले सामान का बड़ा उपक्रम खोलकर किसानों को गाय पालने के लिए प्रेरित किया है। समिति 171 गांवों से दूध जमा करके न सिर्फ महाराष्ट्र और गुजरात तक दूध ही नहीं, बल्कि छाछ, गुलाब जामुन और रसगुल्ले तक बेच रही है। यही नहीं समिति ने अपना मिनरल वाटर भी बाजार में उतार दिया है। किसानों के लिए समिति का सदैव यही मूल मंत्र रहता है कि गन्ने के साथ-साथ छोटे काम धंधे भी किए जाएं। समिति ने किसानों के बच्चों के लिए नर्सरी से लेकर उच्च शिक्षा का प्रबंध भी संगमनेर जैसे छोटे इलाके में किया है।

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