अगले साल के आम बजट में दिल्ली की जनता को मैट्रो रेल के फेज-3 के लिए रु.500 करोड़ की सौगात मिल सकती है। वहीं चैन्नई और बेंगलुरू मैट्रो रेल के लिए छह हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया जा सकता है। वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी आगामी 28 फरवरी को लोकसभा में आम बजट पेश करेंगे। उनकी बजट की लगभग तैयारियां पूरी हो गई हैं। अब केवल उनके बजट भाषण को अंतिम रूप दिया जा रहा है। जो संभवत 25 फरवरी तक छप जाएगा। बजट में अन्य बातों के अलावा मैट्रो रेल का खास ध्यान रखा गया है। दिल्ली में 105 किलोमीटर रेलट्रैक तैयार किया जाना है और केंद्रीय टर्मिनल से बदरपुर कॉरिडोर को फरीदाबाद तक ले जाने का प्लान है लेकिन धन का जुगाड़ न होने के कारण मामला अभी अधर में लटका है। सूत्रों के अनुसार योजना आयोग ने दिल्ली सरकार को 50:50 के अनुपात में खर्चा उठाने का फरमान सुनाया है। यानि 50 प्रतिशत केंद्र और राज्य सरकार धन का जुगाड़ करेंगे और 50 प्रतिशत बाजार से कर्जा लिया जाएगा। मैट्रो के तीसरे चरण के लिए कुल रु.28, 000 करोड़ की आवश्यकता है। काम शुरू करने के लिए वित्तमंत्री बजट में टोकन मनी के रुपए में रु.500 करोड़ का इंतजाम कर सकते हैं। जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी तीसरे चरण को फंडिंग के लिए तैयार हो गई है। बेंगलुरू और चेन्नई में भी मैट्रो बननी है। यहां भी फंडिंग की ही समस्या है। लेकिन पहला चरण होने के कारण केंद्र सरकार रु.6000 करोड़ का प्रावधान कर रही है। बाकी धन का इंतजाम बाजार से कर्जा ले कर किया जाएगा।
Tuesday, February 22, 2011
बजट में मेट्रो को मिलेगी 500 करोड़ की सौगात !
अगले साल के आम बजट में दिल्ली की जनता को मैट्रो रेल के फेज-3 के लिए रु.500 करोड़ की सौगात मिल सकती है। वहीं चैन्नई और बेंगलुरू मैट्रो रेल के लिए छह हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया जा सकता है। वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी आगामी 28 फरवरी को लोकसभा में आम बजट पेश करेंगे। उनकी बजट की लगभग तैयारियां पूरी हो गई हैं। अब केवल उनके बजट भाषण को अंतिम रूप दिया जा रहा है। जो संभवत 25 फरवरी तक छप जाएगा। बजट में अन्य बातों के अलावा मैट्रो रेल का खास ध्यान रखा गया है। दिल्ली में 105 किलोमीटर रेलट्रैक तैयार किया जाना है और केंद्रीय टर्मिनल से बदरपुर कॉरिडोर को फरीदाबाद तक ले जाने का प्लान है लेकिन धन का जुगाड़ न होने के कारण मामला अभी अधर में लटका है। सूत्रों के अनुसार योजना आयोग ने दिल्ली सरकार को 50:50 के अनुपात में खर्चा उठाने का फरमान सुनाया है। यानि 50 प्रतिशत केंद्र और राज्य सरकार धन का जुगाड़ करेंगे और 50 प्रतिशत बाजार से कर्जा लिया जाएगा। मैट्रो के तीसरे चरण के लिए कुल रु.28, 000 करोड़ की आवश्यकता है। काम शुरू करने के लिए वित्तमंत्री बजट में टोकन मनी के रुपए में रु.500 करोड़ का इंतजाम कर सकते हैं। जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी तीसरे चरण को फंडिंग के लिए तैयार हो गई है। बेंगलुरू और चेन्नई में भी मैट्रो बननी है। यहां भी फंडिंग की ही समस्या है। लेकिन पहला चरण होने के कारण केंद्र सरकार रु.6000 करोड़ का प्रावधान कर रही है। बाकी धन का इंतजाम बाजार से कर्जा ले कर किया जाएगा।
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