Thursday, February 3, 2011

चीनी गाजर की तस्करी से यूपी के किसान हलकान


भारतीय अर्थव्यवस्था पर निरंतर चोट कर रहा चीन अब गाजर लेकर सामने आया है। नेपाल से लगी खुली सीमा के रास्ते चीन प्रतिदिन लाखों रुपये मूल्य का गाजर भारतीय क्षेत्र में पहुंचा रहा है। आसपास के भारतीय किसानों पर इसका खराब असर दिखाई देने लगा है और वे परेशान हैं। इससे पहले सेब और प्याज को निर्यात कर भारतीय भारतीय अर्थव्यवस्था को तोड़ने की कोशिश कर चुके चीन के इस कदम से सीमाई इलाकों के किसान हलकान हैं। भारत सरकार ने भी चीन की इस साजिश को को गंभीरता से लिया है, जिसके तहत खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय हैं। नेपाल से लगी 1751 किमी लंबी सीमा से सटे भारतीय क्षेत्र के जनपदों में इन दिनों चीनी गाजर ने धूम मचा रखी है। बेहद लाल और बड़े आकार वाली यह गाजर भारतीय क्षेत्र में 10 रुपये किलो बिक रही रही है। इसकी अपेक्षा छोटे आकार और मटमैले आकार की भारतीय गाजर को 15 रुपये किलो बिक रही है। मूल्य कम होने के कारण भी उपभोक्ता के बीच चीनी गाजर की भारी मांग है। भारतीय कृषि क्षेत्र पर चीन का यह आक्रमण नया नहीं है। इसके पहले वह अपने सेब के माध्यम से भारतीय बाजार पर कब्जा करने का प्रयास कर चुका है। आखिर चीन की गाजर की बिक्री का राज क्या है, इस बारे में जिले के प्रगतिशील कृषक विजय सिंह का कहना है कि भारत सरकार औद्यानिक कृषि को बढ़ावा देने के प्रति उदासीन है, जबकि चीन अपने यहां कृषि को विज्ञान व टेक्नालाजी के बराबर महत्व दे रहा है। इस सिलसिले में एसपी जे. रवींद्र गौड़ ने कहा कि वह अभी नए आए हैं। दैनिक जागरण से मिली इस जानकारी को संज्ञान में लेते हुए वह गाजर की तस्करी को रोकने के लिए गंभीरता से प्रयास करेंगे। बेहद लाल रंग वाली चाइनीज गाजर चीन (तिब्बत) के ल्हासा जिले से होकर नेपाल के खासा जिले में आती है। वहां से तस्करों के माध्यम से भारत नेपाल सीमा पर रात में चोरी छिपे लाकर डंप की जाती है और मौका देखकर उसे भारतीय क्षेत्र में पहुंचा दिया जाता है। चीनी गाजर सामान्यत: उन कच्चे मार्गो से ट्रैक्टर-ट्राली और साइकिल पर लाद कर लाई जाती है, जिनसे भारत से खाद नेपाल पहुंचाई जाती है।


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